“गाँधी जी की अहिंसा का जो प्रभाव इस देश पर पड़ा वह इसीलिए नहीं कि लोगों को अहिंसा ठीक मालूम पड़ी। लोग हज़ारों साल के कायर हैं और कायरों को यह बात समझ पड़ गयी कि ठीक है, इसमें मरने मारने का डर नहीं है, हम आगे जा सकते हैं। लेकिन तिलक गाँधी जी की अहिंसा से प्रभावित नहीं हो सके, सुभाष भी प्रभावित नहीं हो सके। भगत सिंह फांसी पे लटक गए और हिंदुस्तान में एक पत्थर नहीं फेंका गया उसके विरोध में। … आखिर क्यों ??”
-ओशो-
